लो ब्लड प्रेशर के उपाए

रोग नहीं, रोगों का लक्षण है लो ब्लड प्रेशर

बहुत सारे लोग लो ब्लड प्रेशर (निम्न रक्तचाप) नाम की बीमारी से भयभीत रहते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि यह अपने आप में कोई स्वतंत्र बीमारी नहीं है। यह एक प्रकार का लक्षण है, जिससे शरीर में आए विभिन्न दोषों के बारे में संकेत मिलता है। कारण का निवारण समय रहते कर दें, तो डरने की आवश्यकता नहीं ।

ब्लड प्रेशर कम हो तो हो सकते हैं ये कारण –

1- रक्त की कमी(anemia) – लाल रक्त कणों, हीमोग्लोबिन व प्लाजमा कंटेन्स की रक्त में कमी होने पर रक्त चाप सामान्य से कम रहता है।

2 – पोषण की कमी – खानपान में पर्याप्त पोषक तत्व नहीं हों या खाये हुए का अवशोषण, मेटाबॉलिज्म पूर्ण रूप से नहीं हो तो रक्त व प्लाजमा कंटेन्स पूरे मेंटेन नहीं होंगे और रक्तचाप सामान्य से कम रहेगा।

3 – सिस्टेमिक बीमारियां – ह्रदय रोग, किडनी, मूत्र संस्थान के रोग, यकृत प्लीहा के विकार श्वसन तंत्र के रोग तथा अन्य विभिन्न तंत्रो के रोग हो ने पर शरीर में रक्त का परिसंचरण कम होता है और रक्तचाप कम रहता है।

4 – रक्त श्राव – चोट लगने, या सर्जरी में अधिक रक्त बहने या शरीर में आंतरिक रक्त श्राव यथा बड़ी हड्डी के फ्रेक्चर में आंतरिक रक्त श्राव होने पर रक्त चाप कम हो जाता है। बड़ी सर्जरी में तो रक्त चाप का अचानक गिरना आंतरिक रक्तश्राव का प्रथम दृष्ट्या निदान भी मानते हैं ।

5 – मनोस्थिति – मनःसंताप, शोक, भय, चिंता, तनाव, आदि मनः स्थितियों में पेरिफेरल आर्टरीज फैल जाती है और रक्त चाप कम हो जाता है। जिस प्रकार कोलेस्ट्रोल जमा होने के कारण धमनियां सिकुड़ जाती है, तब रक्त चाप बढ जाता है उसी प्रकार धमनियों के फैलने से रक्त चाप कम होता है। अचानक रक्त चाप गिरने से चक्कर आना, शिथिलता, बेहोशी भी हो सकती है। ह्रदय कार्य करना बंद कर दे तो मृत्यु भी हो सकती है।

इस प्रकार रक्त भार कम होना विभिन्न रोगों का संकेत है। इसके आधार पर शरीर में छिपी बीमारियों का निदान करना चाहिए।

लो ब्लड प्रेशर में ध्यान रखने योग्य बातें –

लम्बे समय तक निम्न रक्त भार रहने से शरीर के अंगों व विशेष कर मस्तिष्क को कम रक्त, आक्सीजन व पोषण मिलता है। इससे शरीर के अंगों की कार्य क्षमता कम होती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है। मस्तिष्क का कार्य, एकाग्रता, स्मरण शक्ति, धैर्य, बुद्धि मता प्रभावित होते हैं। इसलिए समय पर निदान करवा कर मूल रोग का उचित उपचार करवाना चाहिए।

लो ब्लड प्रेशर के लाक्षणिक प्राकृतिक व आयुर्वेदिक उपचार –

1-त्रिकटु चूर्ण (सौंठ, मरिच, पिप्पली) – 1-2 ग्राम सैंधव लवण नींबू रस मिला कर लेना।

2-रसदार फलों अनार, संतरा, अन्नानास, गाजर का रस (जूस) सैंधव नमक मिलाकर पीना रक्तचाप को मैंटेन करता है।

3- तुरंत आराम व बीपी मैंटेन करने के लिए काॅफी, केशर डाल कर दूध देना चाहिए।

4- रक्तचाप कम होने पर आराम करना रिकवरी के लिए आवश्यक है। चारपाई या पलंग के नीचे सपोर्ट लगा कर पैरों की तरफ से उंचा उठा देना लाभकारी है। इससे सिर शरीर के अक्ष से नीचे हो जाता है और मस्तिष्क की ब्लड सप्लाई बढ जाती है, जो लाभप्रद है।

4- दिनचर्या में स्वास्थ्य नियमों का पालन, हल्की एक्सरसाईज जैसे प्रातः भ्रमण, पर्याप्त पोषण लेना, नींद पूरी लेना, तनाव मुक्त व प्रसन्न रहना लाभप्रद है। विशेषतः महिलाएं रक्त हीमोग्लोबिन को मैंटेन रखें। इन उपायों से इस व्याधि से बचाव किया जा सकता है।

ब्लड प्रेशर कितना हो, तब उसे कम मानें –

योगी, तैराक, धावक, स्पोर्टसमैन में सामान्य से कम बी पी रहता है। इनमें सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 90-100 ही रहता है। कुछ लोगों में सामान्य रूप से ही ब्लड प्रेशर 100-110 रहता है। अतः यदि कोई लक्षण नहीं हैं यथा चक्कर, कमजोरी, आदि तो चिंतित नहीं होना चाहिये। सिस्टोलिक रक्तचाप 70 से नीचे होने पर इमरजेंसी व 40 से कम होने पर मृत्यु हो सकती है और ऎसा जो कारक रोग बताये हैं, उनकी एडवांस स्टेज में ही होता है।

डिहाइड्रेशन से भी अल्प काल के लिये लो बी पी हो सकता है समय रहते जल व लवणों की पूर्ति कर दी जाती है तो रोगी की जीवन सुरक्षित हो जाता है और रक्तचाप भी मैंटेन हो जाता है।

लीलाधर शर्मा आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी गुसांईसर चूरू ।

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