मौसमी बिमारियों से रक्षण के उपाय

आयुर्वेदीय मौसमी बिमारियों से रक्षण के उपाय

बदलते मौसम में सर्दी, के आगमन के साथ ही जुकाम, खांसी, गले में खरास, वायरल फीवर एन्फ्लूएंजा और स्वाईन फ्लू जैसी दुष्कर मौसमी बीमारियां होना संभावित है। साथ ही मच्छरों का प्रकोप भी होता है। मलेरिया, चिकन गुनिया, डेंगू, बिमारियां भी हो सकती है।
इन बीमारियों से ग्रसित होने पर इनकी कुछ अवस्थाओं में ग्रसित रोगी गंभीर अवस्था में पंहुच जाता है, तब उपचार कठिन और महंगा हो जाता है।आम आदमी के लिए वहन करना कठिन हो जाता है। इससे अच्छा है इन बिमारियों से बचाव। बचाव के लिए एहतियात जरूरी है। जागरूक रहकर, सही दिनचर्या व ऋतुचर्या का पालन करके इनसे बचाव रखा जा सकता है। साथ ही आयुर्वेद की औषधियां, घरेलू नुक्शे, विशेष रूप से बहुत प्रचलित काढा या क्वाथ इन बिमारियों से बचाव व उपचार दोनो में प्रभावी है।

काढा तैयार करने की विधि –

  1. आयुर्वेद शास्त्रीय योगों के अनुसार सुखी काष्ठ औषधियां काढा या क्वाथ के नाम से मिलती हैं, जैसे गोजिव्हादि क्वाथ, वात श्लैष्मिक ज्वर हर क्वाथ, धान्य पंचक क्वाथ, दशमूल क्वाथ, आदि।
  2. काढ़ा तैयार करने के लिए शुष्क औषधियां लें, बङे व्यक्ति के लिए 25 ग्राम किशोर अवस्था के लिए 15 ग्राम छोटे बच्चों के लिए 10 ग्राम सूखी क्वाथ औषधि की एक मात्रा होती है। घर के सदस्यों की आयु व संख्यानुसार क्वाथ औषधि लें, 4 गुना पानी में मंदी आंच पर इतना उबालें, जब तक कि तीन चौथाई भाग पानी भाप बनकर उड़ जाए और काष्ठोषधियां नरम होकर गाढा मिश्रण तैयार हो जाए। इससे काष्ठ औषधियों का सार भाग पानी में आ जाता है।
  3. इस सार भाग को साफ बर्तन में छान लेते हैं, इसके लिए साफ कपड़े में चमचे से मिश्रण को डालकर हाथ से निचोड़ा जाता है। कपड़े में जो काष्ठोषधियों का शुष्क भाग बचता है, उसे अलग से इकट्ठा कर लें। यह वेस्ट प्रोडक्ट है।
  4. इस प्रकार पूरा मिश्रण छान लें, जो छनित प्राप्त हो वही काढा या क्वाथ है। यह लिक्विड एक्सट्रैक्ट स्वरूप है।
  5. गर्म अवस्था में ही उपयुक्त मात्रा में गुड़ या चीनी मिला लें, जिससे बच्चों के लिए लेने में आसान और स्वादिष्ट बन जाए!

1 किलो काष्ठ औषधियों से बड़ों के लिए 40 खुराक, 8 से 13 वर्ष तक के बच्चों के लिए 60 खुराक, और छोटे बच्चों के लिए 80- 100 खुराक तैयार होती हैं।

मात्रा-
बड़ों के लिए – 25ml
8 से 13 वर्ष – 15ml
8 वर्ष तक- 10ml

गोजिव्हादि क्वाथ* –


घटक द्रव्य-गोजिव्हा, मुलहठी, सौंफ, मुनक्का, अंजीर, उन्नाव, वासा (अङूसा), जूफा, सूखा लिसोङा (लेसूआ का फल ), खूबकला, हंसराज, गुलबनफसा, अलसी, खतमी की जङ, भटकटैया (छोटी कटेली),काली मिर्च।
सर्दी, जुकाम,श्लैष्मिक ज्वर, श्वास, खांसी -उपचार व प्रतिषेधात्मक

वातश्लैष्मिक ज्वर हर क्वाथ’


घटक द्रव्य-वासा, कंटकारी, हरिद्रा, सौंठ, भारंगी, तालीस पत्र, मुलहठी, तुलसी पंचांग, काली मिर्च, लौंग, पिप्पली, चिरायता,
सर्दी, जुकाम, गले में खरास,श्लैष्मिक ज्वर, एन्फ्लूएंजा-उपचार व प्रतिषेधात्मक


धान्य पंचक क्वाथ*


घटक द्रव्य -धान्यक(धनियां ), नागर (अदरख), नागरमोथा, बला, बिल्व,
ज्वर, वायरल फीवर – उपचार व प्रतिषेधात्मक


दशमूल क्वाथ*


घटक द्रव्य-बिल्व, अग्निमंथ(अरणी), श्योनाक(सोनपाठा), पाढला, गंभारी, शालिपर्णी, पृश्नपर्णी, वृहती(बङी कंटकारी), कंटकारी,

गोक्षुर(बङा गोखरू)


शीत सर्दी जन्य रोग जुकाम, बुखार, श्लैष्मिक ज्वर जन्य शारिरिक शूल व शोथ


घरेलू नुस्खा

मौसमी बीमारियों के उपचार व प्रतिषेध के लिए घरेलू स्तर पर होम रेमेडी काढा भी बनाया जा सकता है। 5-7 तुलसी के पत्ते, 4-5 काली मिरच, 5 ग्राम अदरक, पांच ग्राम गीली अथवा 2 ग्राम सूखी हल्दी, 1 ग्राम दालचीनी (एक व्यक्ति के लिए)

जितने व्यक्तियों के लिए तैयार करना हो, उतनी मात्रा में लेकर पानी में 15–20 मिनट मंदी आंच पर उबाल लें।

छान कर थोड़ा मीठा डाल कर चाय की तरह पी लें।

3 दिन लेने पर शीत जन्य बीमारियों में प्रतिषेधात्मक व उपचारात्मक कार्य करता है।
त्रिकटु चूर्ण की चूषने की गोली-सौंठ काली मिर्च, और पिप्पली के मिश्रण को त्रिकटु चूर्ण कहते हैं। 50ग्राम त्रिकटु चूर्ण को 30 ग्राम गुङ की चासनी में मंदी आंच पर गाढी चासनी होने तक गर्म करलें। थोङा ठंडा करलें। सुखोष्ण अवस्था में ही एक एक ग्राम की गोलियां बना लें। -खांसी में एक गोली मुंह में रख कर चूषते रहें। तीव्र खांसी का वेग भी रूक जाता है। योग एवं प्राणायाम – नित्य योग व अनुलोम विलोम, भ्रस्त्रिका, भ्रामरी उज्जयी प्राणायाम, प्रातः भ्रमण करना फेफड़ों को स्वस्थ व मजबूत करता है। फेफड़ों की बीमारियों के प्रति शारिरिक प्रतिरक्षा शक्ति बढती है।


एहतियात व बचाव*–मच्छर जनित रोगों से बचाव के लिए

  1. अपने आसपास में मच्छर को उसकी प्रत्येक अवस्था लार्वा प्यूपा व्यस्क मच्छर को नष्ट करना चाहिए। घरों में व आसपास पानी जमा नहीं रहने दें। पानी इतना हो कि उसे ड्रेन करना संभव नहीं हो तो उसमे mlo छिङक दें।
    MLO-तीन भाग कैरोसीन तैल एक भाग जला हुआ इंजिन आयल है। यह पानी के उपर एक लेयर बना देता है जिससे लार्वा का श्वसन बंद हो जाता है और वह मर जाता है।
    वयस्क मच्छरों को नष्ट करने के लिए घर में नीम की सूखी पत्तियों या बुई का धुंआ करदें। और कमरे को कुछ देर के लिए बंद कर दें। मच्छर मर जायेंगे। यह सप्ताह में एक बार रीपीट कर दें तो घर में प्रवेश करने वाले मच्छर बार बार मरते जायेंगे।
  2. सोते समय नीम तैल, निंबोली तैल कङुए तैल शरीर पर लगाना, पूरी बाजू की शर्ट पहनना, इनसे मच्छर काट नहीं सकता।इन तैलों को दीपक में जलाने से भी मच्छर धुएं की गंध से भाग जाते हैं या निष्क्रिय हो जाते हैं।
  3. शीत जन्य बीमारियों सर्दी, जुकाम, गले में दर्द, खांसी, एन्फ्लूएंजा, श्वास, वायरल बुखार, श्वसनिका शोथ (ब्रोंकाइटिस ), स्वाईन फ्लू, से बचाव के लिए एहतियात रखें, मौसम के अनुसार तापक्रम के पानी से नहाना चाहिए। मौसम अनुरूप कपड़े पहनें।
    बासी भोजन ठंडा, भोजन, नहीं करें।
    विवाद शादियों में आईस क्रीम, कुल्फी, ठंडी चीजें नहीं खांये।
  4. भोजन से पहले व शौच निवृति के बाद साबुन से हाथ धोएं। स्वाईन फ्लू का वायरस हैंड टू हैंड कांटेक्ट से भी स्थानांतरित होता है।
    भीङ भाङ भरे स्थान पर जाने से बचें। यदि जाना भी हो तो नाक व मुह पर मास्क, साबुन से धुला हुआ साफ रूमाल लगाएं।
  5. नाक या गले से निकलने वाला म्यूकस खुले में यों ही ना फेंक दें। इसे रेत – मिट्टी से ढक दें।छींकते, खांसते समय भी ध्यान रखें मुह-नाक के सामने हाथ लगाएं ताकि छींक या म्यूकस में वायरस हो तो वह दूर तक नहीं फैले।
    इस प्रकार एहतियात रख कर और आयुर्वेद के नुक्शे, दिनचर्या, ऋतुचर्या, अपना कर मौसमी बीमारियों से बचाव रखते हुए स्वस्थ रहा जा सकता है।
    लीलाधर शर्मा
    आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी गुसांईसर चूरू

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