Uncategorized

यौगिक-षट्कर्म

शरीर को कायाकल्प करते हैं यौगिक षट्कर्म

षट्कर्म दो मुख्य प्राण प्रवाहों इड़ा और पिंगला के मध्य सामंजस्य स्थापित करते हैं ,जिससे शारीरिक और मानसिक शुद्धि एवं संतुलित की प्राप्ति होती है ये शरीर में उत्पन्न त्रिदोषों वात,पित्त और कफ़ को भी संतुलित करते हैं आयुर्वेद एवं हठयोग दोनों के अनुसार , इन त्रिदोषों में असंतुलन ही रोग का कारण बनता है …

शरीर को कायाकल्प करते हैं यौगिक षट्कर्म Read More »

Birbal Singh Lamba की कलम से डॉ मनोज शर्मा “योगाचार्य” के बारे में

विलक्षण व्यक्तित्व, चहुंमुखी प्रतिभा , अंतहीन जोश व जुनून के धनी डॉ मनोज शर्मा “योगाचार्य” चूरू की सड़कों पर यदि गले मे बैग, कैमरा लिये छः फुट लम्बा, गोरा,शानदार शारीरिक शौष्ठव वाला और चेहरे पर अलौकिक आभा के साथ मुस्कुराहट बिखेरता कोई व्यक्ति जा रहा हो तो उसकी पहचान डॉ मनोज शर्मा “योगाचार्य” के रूप …

Birbal Singh Lamba की कलम से डॉ मनोज शर्मा “योगाचार्य” के बारे में Read More »